तंग गलियों से भी कूड़ा उठाएंगे ये रिक्शे
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नवभारत टाइम्स | Jun 27, 2013, 08.00AM IST
सिविक सेंटर :
साउथ दिल्ली की तंग गलियों में फैले कूड़े-कचरे को उठाने के लिए साउथ एमसीडी ने नई पहल की है। इन गलियों में डोर टु डोर गारबेज कलेक्शन के लिए और घरों के बाहर सड़क पर पड़े कूड़े को उठाने के लिए साउथ एमसीडी नए तरह के रिक्शे ला रही है। साइकल से खींचे जाने वाले इन रिक्शों की डिजाइन दूसरे रिक्शों से काफी अलग होगी और इनकी बॉडी भी फाइबर की होगी, जिससे इन्हें आसानी से खींचा जा सकेगा।
साउथ
Security Guard,Housekeeping & Solid Waste Management Services
Friday, 18 October 2013
भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा कचराघर
भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा कचराघर
Monday, April 8, 2013, 8:41
मुद्दा
Dumping Yard1पिछले दिनों ब्रिटेन में जारी एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े कचड़ा घर में तब्दील हो गया है। दुनिया के विकसित देश स्वयं को स्वच्छ रखने के लिए अपना कूड़ा-कचरा विकाशील देशों विशेषकर भारत, इंडोनेशिया और चीन में डम्प कर रहे हैं। रिसाइकिलिंग के नाम पर जमा हो रहे कचरे के चलते भारत विष्व के सबसे बड़े कचरा घर में तब्दील होता जा रहा है।
ब्रिटेन के ‘डिपार्टमेंट आफ इनवायरमेंट फूड एंड रूरल अफेयर’ की ओर से जारी रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि प्रतिवर्ष 12 मिलियन टन के कचरे का आखिर क्या होता है। चिंता की बात यह है कि कचरे को विदेशों खासकर एशिया में भेजने का यह सिलसिला पिछले एक दषक में दूगना हो गया है। कानून कहता है कि विदेश भेजने के बाद कचरे के रिसाइकिलिंग अनिवार्य है, जबकि पर्यावरण विभाग स्वयं यह स्वीकार करता है कि कुछ देशों में रिसाइकिलिंग के नाम पर कचरा जलाया या घरती में दबाया जा रहा है।
भारत में जितनी मात्रा में कचरा घरती में दबाया जा रहा है, उतनी ही तेजी से लैंडफिल गैसों के उत्सर्जन का खतरा बढ़ रहा है। घरती म दबे कचरे से लैंडफिल गैसों का उत्सर्जन होता है जिससे पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित होता है। जनता में भयानक बीमारियां पैदा होती है। घ्यान रहे कि लैंडफिल गैंसों के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।
Dumping Yard2पहले विकसित देश भी अपना कूड़ा धरती में दफना देते थे, किन्तु इस पर प्रतिबंध लगने के कारण उन्होंने अपना कचरा डम्प करने के लिए उन देशों की तलाष की जहां रिसाइकिलिंग करने के नाम पर कचरा निर्यात किया जा सके। आष्चर्य होगा, किन्तु विष्व के 105 देश अपना औद्योगिक कचरा भारत भेजते हैं। पर्यावरण एजेंसियां इस बात पर चिंता जाहिर कर ही हैं कि जितना कचरा विदेशों से भारतीय बंदरगाहों पर आता है उसमें से महज 40 या 50 फीसदी कचरा ही रिसाईकिल हो पाता है, बांकि या तो जला दिया जाता है या फिर धरती में दबा दिया जाता है।
चिंता की बात यह है कि सिर्फ अमीर देशों को भी इसके लिए दोष नहीं दिया जा सकता। इन देशों में बकायदा कचरा निस्तारण के लिए कानुन बने है। किन्तु भारत सरकार सारे खतरे को जानने के बाद भी इस संबंध में कोई कानून नहीं बना रहा है। महज कुछ आर्थिक फायदों के लिए भारतीय कानून पर्यावरण और भारत की जनता की जान के लिए इतना बड़ा खतरा मोल ले रहा है। दुनिया में चिंता का विषय बन चुके कचरा निस्तारण पर गंभीर कदम उठाने के बजाय भारत सरकार बेसल कन्वेंषन को समर्थन दे रहा है। यह ऐसी नीति है जिसके अन्तर्गत भारत अपने बंदरगाहों पर विकसित देशों को अपना कचरा निर्यात करने की सहमति देता है। विकसित देश धड़ाधड़ अपना कचरा भारत में डम्प कर रहे हैं।
नगर निगम हाउस ने सेक्टर 22 में 16 अप्रैल से डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन पॉयलट प्रोजेक्ट को शुरू करने की मंजूरी दे दी। इसके सफल होने पर तीन महीने बाद दूसरे सेक्टरों में प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।
नगर निगम हाउस ने सेक्टर 22 में 16 अप्रैल से डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन पॉयलट प्रोजेक्ट को शुरू करने की मंजूरी दे दी। इसके सफल होने पर तीन महीने बाद दूसरे सेक्टरों में प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।
इसके तहत रेजिडेंशियल एरिया , बूथ और सिंगल एससीओ व एससी एफ पर गारबेज कलेक्शन चार्जेज 30 से 75 रुपये होंगे। वहीं मंदिर और गुरुद्वारा को चार्जेज फ्री किए जाने की सिफारिश भी की गई। धोबी घाट के चार्जेज फाइनल नहीं हो सके।
नगर निगम कमिश्नर वीपी सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट की डायरेक्शन पर सेक्टर 22 में डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन के पायलट प्रोजेक्ट को शुरु किया जा रहा है, अगर यह प्रोजेक्ट तीन महीने तक सफल रहता है तो इसे शहर के दूसरे सेक्टरों में शुरू किया जाएगा। सेक्टर में पहले से गारबेज डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन में लगे कर्मचारियों को ठेकेदार द्वारा रखने की प्राथमिकता दी जाएगी। अगर कर्मचारी ठेकेदार के साथ काम करना नहीं चाहते तो दूसरे आदमियों को मौका दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को शुरू किए जाने के लिए एरिया काउंसलर और अधिकारियों के साथ पिछले आठ दिन से कार्य करने में लगे हैं।
भाजपा के अरुण सूद ने टिप्पणी की , सभी प्रोजेक्ट प्रदीप छाबड़ा के वार्ड से ही क्यों शुरू किए जा रहे हैं। इस पर निगम कमिश्नर वीपी सिंह ने कहा कि यह सेक्टर 22 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है। अगर यह तीन महीने में सफल रहता है तो दूसरे सेक्टरों में भी लागू होगा। इसपर सूद और भाजपा के अन्य पार्षदों ने कहा कि हमारे वार्ड से सेक्टरों में भी इसे लागू किया जाए। निगम कमिश्नर ने कहा कि जरूर।
भाजपा की आशा जसवाल ने कहा कि तय किए गए रेट फ्लोर वाइज होने चाहिए। पांच मरला और सात मरला की कोठियों में फस्र्ट और सेकंड फ्लोर पर रहने वालों की आपस में लड़ाई झगड़ा होगा। कांग्रेस के प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि गारबेज कलेक्शन चार्जेज रेजिडेंट्स और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन्स के साथ मीटिंग करके तय किए गए हैं। अगर कोठियों में पानी के दो मीटर लगे हैं तो उनपर प्रति मीटर अलग से चार्जेज होंगे। अभी मंदिर , गुरुद्वारा में चार्जेज तय नहीं किए गए हैं। इसपर मनोनीत पार्षद सतपाल बंसल, भाजपा के देवेश मौदगिल व अन्य ने कहा कि धार्मिक स्थलों को छोड़ा जाए।
कूड़ा उठाने के चार्जेज
12 व 13 टाइप हाउसेस- 30 रुपये
9, 10, 11 टाइप हाउसेस-40 रुपये
5 मरला कोठी- 50 रुपये
7 मरला कोठी -60 रुपये
10 मरला कोठी-75 रुपये
शास्त्री मार्केट, वेजिटेबल मार्केट बूथ-30 रुपये
अन्य बूथ-40 रुपये
जूस/पान/ चाट/हलवाई शॉप-100 रुपये
रेस्टोरेंट ग्राउंड फ्लोर- 150 रुपये
एससीओ/एससी एफ- 75 रुपये
होटल/ एससीओ/एससी एफ सिंगल बे- 150 रुपये
होटल/सिंगल वेज एससीओ ग्राउंड फ्लोर- 150 रुपये
होटल सिंगल वे/एससीओ/एससी एफ फस्र्ट/ सेकंड फ्लोर- 100
अरोमा/पिकाडली/सनबीम होटल- 2 हजार रुपये
किरण सिनेमा- 2 हजार
स्कूल/पॉलीक्लिनिक/वेटनरी हॉस्पिटल- एक हजार रुपये
टैक्सी स्टैंड- 150 रुपये
कोयला डिपू- 300 रुपये
पेट्रोल पंप- 250 रुपये
क्रैच-100 रुपये
Tuesday, 24 September 2013
कूड़ा बीनने वाले बचा सकते हैं पर्यावरण
कूड़ा बीनने वाले बचा सकते हैं पर्यावरण Updated on: Sun, 18 Nov 2012 07:13 PM (IST) बरेली: रोज के कचरे और उसमें मौजूद प्लास्टिक के नुकसान पर कई संस्थाएं और सरकार जागरूक करती रहती हैं। उपजा प्रेस क्लब में रविवार को अखिल भारतीय कबाड़ी मजदूर महासंघ (एआइकेएमएम) और असंगठित श्रमिक अधिकार मोर्चा (यूएलआरएफ) ने सेमिनार करके आसान और न्यायसंगत रास्ता सुझाया। सेमिनार में असंगठित श्रमिक अधिकार मोर्चा के महासचिव हरीश पटेल ने कहा कि कूड़ा उठाने वाली आबादी समाज में अछूत की तरह हाशिये पर है। कूड़ा बीनकर उसकी छंटाई और रिसाइकिलिंग में योगदान को फिर भी नजरंदाज किया जाता है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह ने कहा कि यह मानवाधिकार कानूनों के लिए चिंतनीय विषय है। इस अहम कड़ी से जुड़ी आबादी को कानूनी तौर पर इज्जत देकर नगर पालिका का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। यूएलआरएफ के मुश्ताक हुसैन ने कहा कि सॉलिड वेस्ट को बेहतर तरीके से निस्तारित किया जाए तो पर्यावरण की काफी रक्षा की जा सकती है। सेमिनार में बताया गया कि दस दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर एआइकेएमएम का राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। अगले दिन गोष्ठी होगी, जिसमें दूसरे देशों के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। आयोजन में मजदूर मंडल के लक्ष्मण सिंह राणा, इंकलाबी मजदूर केंद्र के सतीश कुमार, टीडी भास्कर, चंद्रपाल सिंह आदि शामिल हुए। पेश किया मॉडल एआइकेएमएम की ओर से कूड़ा निस्तारण के लिए पेश किए मॉडल में बताया गया कि कुल कचरे का 80 फीसद घरों से ही पैदा होता है। जिसमें 50 फीसदी जैविक कचरा को बायो गैस आदि से और 30 फीसद को रिसाइकिलिंग के जरिये सामुदायिक स्तर पर निपटाया जा सकता है। केवल 20 प्रतिशत कचरा ही ऐसा होता है, जिसे समाप्त करना होगा। कचरे की छंटाई के लिए मौजूदा कूड़ा बीनने वालों को ही लगाया जा सकता है। इस मॉडल पर बेंगलोर में काम किया जा रहा है। इसको संचालित कराने के लिए महासंघ नगर निगम को मुफ्त सेवा देने को तैयार है। यह भी जानें कूड़ा बीनने वाले हर साल 9 लाख 62 हजार 133 टन कार्बन डाईऑक्साइड गैसों को अप्रभावी बनाते हैं। यह एक लाख 75 हजार मोटर वाहनों से उत्सर्जित की जाने वाले प्रदूषण के बराबर है। सिर्फ दिल्ली में साढ़े तीन लाख लोग कूड़ा बीनने के व्यवसाय में सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर लगे हैं। --------------------- बांझ तक बना सकता है सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अखिल भारतीय कबाड़ी मजदूर महासंघ के सचिव शशि भूषण पंडित ने दैनिक जागरण से बातचीत में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर भी बेबाक राय जाहिर की। उन्होंने बताया कि रविवार को प्लांट जाकर भी देखा। उन्होंने कहा कि कचरा में 70 फीसद प्लास्टिक होती है, जिसके निस्तारण में 90 फीसद क्लोरीन का उत्सर्जन होगा और डाईऑक्सीन गैस वातारण में घुलेगी। इन गैसों का असर पशु और मानव दोनों में बांझपन, हृदय रोग आदि पैदा कर सकता है।
एक पुरस्कार कूड़ा बीनने वालों के नाम
हाईटेक शिक्षा लेेंगे कूड़ा बीनने वाले,शहर के स्लम एरिया में जिलाधिकारी ने खोली विद्यालय
हाईटेक शिक्षा लेेंगे कूड़ा बीनने वाले,शहर के स्लम एरिया में जिलाधिकारी ने खोली विद्यालय September 21, 2013
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फिरोजाबादः कूड़ा बीनने वाले दो दर्जन बच्चों के जीवन में जल्द ही नया सबेरा आने वाला है। स्लम एरिया में रहने वाले इन बच्चों को शिक्षित करने के लिए खुद जिलाधिकारी संध्या तिवारी ने पहल की है। उन्होंने एक हाईटेक स्कूल खोला है। इसमें अमीरों वाले स्कूल जैसी व्यवस्थाएं होंगी। इस स्कूल का उद्घाटन जल्द ही होगा। तैयारियों अंतिम दौर में चल रही है।
शहर में बालश्रम नई बात नहीं हैं। शासन, प्रशासन और समाजसेवियों के तमाम प्रयासों के बावजूद हजारों की संख्या में बच्चे पढ़ाई छोड़ अपना पेट भरने की जुगत में लगे हैं स्लम एरिया में रहने वाले सैंकड़ों बच्चे सुबह आंख खुलते ही कूड़ा बीनने निकल जाते हैं। स्कूल जाना, पढत्राई करना इनकी दिनचर्या में शामिल नहीं है। जिससे वे धीर-धीरे समाज की मुख्य धारा से अलग हो जाते हैं। ऐसे बच्चों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण दिखाते हुए खुद जिलाधिकारी ने एक अनूठी पहल की है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने एक ऐसा स्कूल खोलने का निर्णय लिया है। इसमें केवल गरीब और कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाया जाएगा। इसके लिए नगला करन सिंह में एक भवन किराए पर ले लिया गया है। इसकी रंगाई-पुताई कर स्कूल के माहौल में ढ़ाला जा चुका है।
इमारत के दो कमरों में एक से पांच तक की कक्षाए संचालित होंगी। उनमें कुल 25 बच्चे पढ़ेंगे। इन बच्चों को किताब, काॅपी, लंच बाॅक्स, पानी की बोतल, डेªस बस्ता सब फ्री मिलेगा। इतना ही नहीं सरकारी स्कूलों की तरह यहां एमडीएम (मध्याह्न भोजन ) भी मिलेगा। भुगतान प्रशासन द्वारा निजी स्त्रोंतों से किया जाएगा। सब कुछ फ्री मिलने वाले इस स्कूल में व्यवस्थाएं हाईटेक होंगी। बैठने के लिए अच्छा फर्नीचर और बोर्ड लगाए जा रहे हैं। स्कूल में एक टीवी और डीवीड़ी है। इससे बच्चों को इंग्लिश मीडियम केस्कूलों की तरह वीडियो दिखाकर कविताएं, रेम्स और अन्य पाठ्यक्रम याद कराया जाएगा। बच्चों के खेलने की भी व्यवस्था है। स्कूल में दो छोटे झूले लगाए जा रहे हैं। स्कूल में सभी व्यवस्थाएं करने और बच्चों के एडमीशन की जिम्मेदारी जिलाधिकारी ने एएलसी को सौंपी है।
Tuesday, 17 September 2013
SOLID WASTE MANAGEMENT SOLUTION
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