Monday, 30 November 2015

कचरा प्रबंधन से ही स्वच्छ होगा भारत

कचरा प्रबंधन से ही स्वच्छ होगा भारतShare this article Share this article सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। झाड़ू उठाने भर से नहीं बल्कि कचरे को ठिकाने लगाने से स्वच्छ भारत का सपना साकार हो सकेगा। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना निकलने वाले लाखों टन कूड़े का उचित प्रबंधन न होने से कई तरह की मुश्किलें पैदा हो गई हैं। खुले में शौच बंद करने के पुख्ता उपाय और घरों से निकलने वाले कूड़े का निस्तारण प्रशासन के लिए कठिन चुनौती बन गया है। कूड़ा-कचरा प्रबंधन से ही स्वच्छ भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। कचरे की प्रकृति बदलने से मुश्किलें और भी कठिन हुई हैं। ठोस, जैविक, अजैविक और ई-कचरा जैसे वर्गों में बांटे जाने के बाद उन्हें ठिकाने लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्हें अलग-अलग छांटना, एकत्रित करना और निस्तारण करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक का होना जरूरी हो गया है। कस्बों से लेकर महानगरों तक में कूड़ा डंपिंग के लिए जगह की किल्लत पैदा हो गई है। इस दिशा में पहल तो की गई है, लेकिन देशभर में टुकड़े-टुकड़े में चल रहे अभियान से स्वच्छ भारत मिशन में गतिरोध की आशंका है। प्रधानमंत्री ने दो अक्तूबर 2019 तक देश को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कारपोरेट, औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र से शहरों से निकलने वाले कूड़ा व कचरा से ऊर्जा, ईंधन, खाद और सीवेज से सिंचाई करने की अपील की है। नायडू ने ठोस कचरा और सीवेज को घटाने, उनकी रिसाइक्लिंग के बाद उपयोग करने पर जोर दिया। सरकार इसके लिए घरेलू और विदेशी कंपनियों को दायित्व सौंपने की तैयारी में है, जो न्यूनतम खर्च में कचरे का प्रबंधन करें। 1.33 लाख टन कचरा दुनिया की 40 फीसद आबादी 21वीं सदी में भी कूड़े व कचरे में जिंदगी बसर करने को मजबूर है। देश के प्रथम व द्वितीय दर्जे के शहरों से रोजाना 1.33 लाख टन कचरा निकलता है। शहरों के 72 फीसद कचरे का उपयोग गड्ढा भरने और 61 फीसद सीवेज के पानी को बिना साफ किये ही नदियों में बहाया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। कचरे के उचित प्रबंधन से सालाना 440 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। इसकी खाद से 30 फीसद रासायनिक खादों का उपयोग कम हो सकता है। खुले में शौच की समस्या भारत के ग्र्रामीण क्षेत्रों में 60 फीसद से अधिक लोग अभी भी खुले में शौच करते हैं, जिन्हें रोकने के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास करना होगा। शहरी क्षेत्रों में भी 20 फीसद से अधिक लोगों के खुले में शौच का आंकड़ा हमें शर्मसार करने के लिए काफी है। खुले में शौच करने के चलते होने वाली गंदगी से देश में 88 फीसद नौनिहाल दम तोड़ देते हैं। छह करोड़ शौचालय का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे से जहां आसानी से कंपोस्ट खाद बनाई जा रही है। लेकिन खुले में शौच करने वालों पर काबू पाना आसान नहीं है। ग्र्रामीण स्कूलों, आंगनवाड़ी व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर शौचालयों का अभाव है। हालांकि अगले चार सालों के भीतर छह करोड़ शौचालय बनाये जाने हैं। इसके लिए हर साल लगभग डेढ़ करोड़ शौचालय बनाये जाने का लक्ष्य है। ग्र्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए कारपोरेट सेक्टर की मदद से 20 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया गया है।

बुलंद हौसलों की कहानीः सड़कों से कूड़ा बीनने वाले की बेटी बनी 'ब्यूटी क्वीन' Reporter : ArunKumar, RTI NEWS Thursday, October 29, 2015 19:08:04 PM Viewed : 533 Keywords : Miss Uncensored News Thailand 2015, Khanittha Phasaeng, Touching moment, Thai Beauty Queen, Kneels Down, Rubbish Collecting Mother, Glittering Tiara , Weird News, World News, Thailand, Miss Uncensored News 201, कहते है कि अगर हौंसले बुलंद हो, और पाने की चाहत हो तो दुनियां की हर शोहरत आपके कदम चूमती है। फिर मंजिल की राहें कितनी भी मुश्किल क्यों न हो.....एक बार फिर एक गरीब मां जो खुद सड़को का कचड़ा बीन-बीनकर परिवार का पेट पालती थी, उसकी बेटी ने थाईलैंड की 'ब्यूटी क्वीन' का ताज जीतकर सबको भौचक्का कर दिया है। जिस परिवारिक माहौल और घर की गरीबी को देखकर दुनियां भर के ज्यादातर बच्चे जीने की चाह छोड़ देते है या सपने देखना बंद कर देते है, ऐसे में एक कचरा बीनने वाली महिला की बेटी ब्यूटी क्वीन भी बन सकती है यह काफी हैरान करने वाली घटना है। थाईलैंड में यहां कचरा बीनने वाली एक महिला की बेटी ने ब्यूटी क्वीन का खिताब अपने नाम कर लिया है। ब्यूटी का खिताब जीतने के बाद उसने अपना ताज मां के कदमों में रख दिया और उनसे आशीर्वाद लिया। आपको बता दें कि भारतीय उपमहाद्वीप समेत एशिया के कई देशों में बड़ों के सम्मान में उनके पैरों पर झुककर आशीर्वाद लेने का रिवाज है। भाव-विभोर कर देने वाली इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। मां को कहा थैंक्यू थाईलैंड की 'ब्यूटी क्वीन' का खिताब जीतने वाली खानिट्टा मिन्ट फासिएंग महज 17 साल की है। उसने बीते महीने मिस अनसेंसर्ड न्यूज थाईलैंड 2015 का क्राउन जीता है। हाल ही में जब वह अपने होमटाउन लौटी तो अपने मां के पैरों में झुक गई और उन्हें थैंक्यू कहा। इस दौरान उसकी मां रास्ते में कचरा बीन रही थी। मिन्ट के सिर पर क्राउन था। उसने सेस (ब्यूटी कॉन्टेस्ट का रिबन) और हाई हील शूज पहने हुए थे। beauty queen मिन्ट ने मीडिया से कहा, इसमें शर्म वाली कोई बात नहीं है। वह मेरी मां है। वह ईमानदारी से अपना काम कर रही है। उन्होंने बहुत मेहनत से मुझे पाला है। वह जो कुछ भी है, अपनी मां की बदौलत है। मिन्ट ने कहा कि वह जीवन के प्रति आशावादी है। वह भी अपने परिवार की छोटी-मोटी नौकरियां करके या मां की कचरा बीनने में मदद करती रहती है। ऐसे पहुंची ब्यूटी कॉन्टेस्ट में मिन्ट को किसी ने बताया था कि उसे थाईलैंड के इस ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेना चाहिए। लेकिन उसने यह नहीं सोचा था कि वह जीत जाएगी। मिन्ट ने बताया कि जब कॉन्टेस्ट के विजेता के नाम की घोषणा हुई तो उसे लगा जैसे वह कोई सपना देख रही हो। उसने कभी नहीं सोचा था कि उस जैसी आम लड़की ब्यूटी क्वीन बन सकती है। मिस अनसेंसर्ड न्यूज थाईलैंड 2015 कॉन्टेस्ट 25 सितंबर को हुआ था। इसमें महिला और ट्रांसजेंडर्स हिस्सा लेते हैं। मिन्ट फासएंग को किसी ने सलाह दी थी कि उसे थाईलैंड के इस ब्यूटी कॉन्टेस्ट में शामिल होना चाहिए, उन्होंने यह कभी नही सोचा था कि वो यह कांस्टेस्ट जीत जाऐंगी। जैसे ही ब्यूटी कॉन्टेस्ट के विजेता का अनाउंसमेंट हुआ, वह उसके लिए सपने जैसा था। उन्होने कभी नही सोचा था कि उनके जैसी सामान्य लड़की कभी ब्यूटी क्वीन बन सकती है। यह ब्यूटी कांटेस्ट 'मिस अनसेंसर्ड न्यूज थाईलैंड 2015' कॉन्टेस्ट 25 सितंबर को हुआ था। इसमें आमतौर पर महिला और ट्रांसजेंडर्स शामिल होते हैं। आर्थिक तंगी के कारण नही हो रहा कॉलेज में दाखिला फिलहाल मिन्ट फासएंग का पूरा परिवार गरीबी वाली जिंदगी ही गुजार रहा है। मिन्ट ने अपना हाई स्कूल पूरा कर लिया है,लेकिन अब आर्थिक तंगी के कारण वो कॉलेज में दाखिला नही ले पा रही है। कॉन्टेस्ट में विजेता बनने के बाद मिन्ट फासएंग को उम्मीद है कि उन्हें एडवर्टाइजिंग, फिल्म और टेलीविजन से ऑफर आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उन्हें उम्मीद है कि उनके घर की स्थिति में थोड़ा सुधार आएगा। मिन्ट फासएंग कहती है कि मां सफाई का काम करती रहेगी, क्योंकि वह उसकी मदद नहीं लेना चाहती। उसकी मां अपने पति से काफी साल पहले अलग हो गईं थीं और दूसरे पुरुष से दोबारा शादी की थी। मिन्ट फासएंग के पड़ोसियों का कहना है कि वह न केवल बेहद खूबसूरत हैं बल्कि काफी मजबूत व दृढ़ इच्छाशक्ति वाली लड़की है। इसके साथ ही वह अब भी मां के साथ कचरा बीनने के काम में सहयोग करतीं हैं।

Recycling (पुनरावर्तन)

साँचा:Recycling पुनरावर्तन में संभावित उपयोग में आने वाली सामग्रियों के अपशिष्ट की रोकथाम कर नए उत्पादों में संसाधित करने की प्रक्रिया ताजे कच्चे मालों के उपभोग को कम करने के लिए, उर्जा के उपयोग को घटाने के लिए वायु-प्रदूषण को कम करने के लिए (भस्मीकरण से) तथा जल प्रदूषण (कचरों से जमीन की भराई से) पारंपरिक अपशिष्ट के निपटान की आवश्यकता को कम करने के लिए, तथा अप्रयुक्त विशुद्ध उत्पाद की तुलना में ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन को कम करने के लिए पुनरावर्तन में प्रयुक्त पदार्थों को नए उत्पादों में प्रसंस्करण की प्रक्रियाएं सम्मिलित हैं. पुनरावर्तन आधुनिक अपशिष्ट को कम करने में प्रमुख तथा अपशिष्ट को "कम करने, पुनः प्रयोग करने, पुनरावर्तन करने" की क्रम परम्परा का तीसरा घटक है. पुनरावर्तनीय पदार्थों में कई किस्म के कांच, कागज, धातु, प्लास्टिक, कपड़े, एवं इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं. हालांकि प्रभाव में एक जैसा ही लेकिन आमतौर पर जैविक विकृतियों के अपशेष से खाद बनाने अथवा अन्य पुनः उपयोग में लाने - जैसे कि भोजन (पके अन्न) तथा बाग़-बगीचों के कचरों को पुनरावर्तन के लायक नहीं समझा जाता है. पुनरावर्तनीय सामग्रियों को या तो किसी संग्रह शाला में लाया जाता है अथवा उच्छिस्ट स्थान से ही उठा लिया जाता है, तब उन्हें नए पदार्थों में उत्पादन के लिए छंटाई, सफाई तथा पुनर्विनीकरण की जाती है. सही मायने में, पदार्थ के पुनरावर्तन से उसी सामग्री की ताजा आपूर्ति होगी, उदाहरणार्थ, इस्तेमाल में आ चुका कागज़ और अधिक कागज़ उत्पादित करेगा, अथवा इस्तेमाल में आ चुका फोम पोलीस्टाइरीन से अधिक पोलीस्टाइरीन पैदा होगा. हालांकि, यह कभी-कभार या तो कठिन अथवा काफी खर्चीला हो जाता है (दूसरे कच्चे मालों अथवा अन्य संसाधनों से उसी उत्पाद को उत्पन्न करने की तुलना में), इसीलिए कई उत्पादों अथवा सामग्रियों के पुनरावर्तन में अन्य सामग्रियों के उत्पादन में (जैसे कि कागज़ के बोर्ड बनाने में) बदले में उनकें ही अपने ही पुनः उपयोग शामिल हैं. पुनरावर्तन का एक और दूसरा तरीका मिश्र उत्पादों से, बचे हुए माल को या तो उनकी निजी कीमत के कारण (उदाहरणार्थ गाड़ियों की बैटरी से शीशा, या कंप्यूटर के उपकरणों में सोना), अथवा उनकी जोखिमी गुणवत्ता के कारण (जैसे कि, अनेक वस्तुओं से पारे को अलग निकालकर उसे पुनर्व्यव्हार में लाना) फिर से उबारकर व्यवहार योग्य बनाना है. पुनरावर्तन की प्रक्रिया में आई लागत के कारण आलोचकों में निवल आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को लेकर मतभेद हैं, और उनके सुझाव के अनुसार पुनरावर्तन के प्रस्तावक पदार्थों को और भी बदतर बना देते हैं तथा अनुभोदन एवं पुष्टिकरण के पक्षपातपूर्ण पूर्वग्रह झेलना पड़ता है. विशेषरूप से, आलोचकों का इस मामले में तर्क है कि संग्रहीकरण एवं ढुलाई में लगने वाली लागत एवं उर्जा उत्पादन कि प्रक्रिया में बचाई गई लागत और उर्जा से घट जाती (तथा भारी पड़ जाती हैं) और साथ ही यह भी कि पुनरावर्त के उद्योग में उत्पन्न नौकरियां लकड़ी उद्योग, खदान एवं अन्य मौलिक उत्पादनों से जुड़े उद्योगों की नौकरियां को निकृष्ट सकझा जाती है; और सामग्रियों जैसे कि कागज़ की लुग्दी आदि का पुनरावर्तक सामग्री के अपकर्षण से कुछ ही बार पहले हो सकता है जो और आगे पुनरावर्तन के लिए बाधक हैं. पुनरावर्तन के प्रस्तावकों के ऐसे प्रत्येक दावे में विवाद है, और इस संदर्भ में दोनों ही पक्षों से तर्क की प्रामाणिकता ने लम्बे विवाद को जन्म दिया है.

Monday, 5 January 2015

Swachh Bharat Mission

:: Swachh Bharat Mission by Foreign Service Institute (FSI) :::
At the call of the Prime Minister of India, Foreign Service Institute (FSI) joined the Swachh Bharat Mission. Not being content to just limit ourselves to cleanliness drive at the Institute, FSI looked at our surroundings and decided to include the vicinity of Ber Sarai where FSI is located.
To jointly discuss the move forward, a meeting was convened at FSI today in which all stakeholders from the neighbourhood of Ber Sarai were invited. Many of them participated including those from Ber Sarai Merchants Association, Ber Sarai DDA Residential Welfare Association, ISTM (Institute of Secretariat Training and Management), National Institute of Health and Family Welfare, Vaikunthnath Temple, as also prominent NGOs like Sulabh International Social Service Organisation, Chintan and Manavata Parivar. The meeting decided to form a coordination committee of all concerned to regularly draw a program of Swachchhata Abhiyaan with the area of Ber Sarai in mind. The next cleanliness drive is scheduled for15 November 2014.

Rag-pickers to be trained in managing waste

The East Delhi Municipal Corporation along with its South Delhi counterpart is going to start a zero waste management scheme on a pilot basis in East Vinod Nagar and Dwarka areas.
The aim of the project is to segregate garbage at source for further utilization and minimise the amount of garbage which is dumped at sanitary landfill sites.
The East Delhi civic body announced the project on Friday, during the presentation of its budget for 2015-16. The corporation claims this will strengthen Swachh Bharat Mission and will also ease pressure on sanitary landfill sites, which have exhausted capacity.
The project will be launched in Dwarka and will be implemented simultaneously at East Vinod Nagar. Both the projects are estimated to start by early next year.
A team of the South Delhi Municipal Corporation studied and proposed to adopt this model successfully undertaken in Pune, for segregation, disposal and composting on ward and housing society-level.
The two corporations had called for a joint expression of interest from private companies and claim they have received encouraging response from over 15 firms willing to participate in the project. 
If the results of the project are satisfactory, the civic bodies will implement it in Vasant Kunj.
The East body has demarcated the land in East Vinod Nagar and DDA has allotted 5 acres of land for the project in Dwarka.
“Under zero waste management, rag-pickers will be trained in segregating different kinds of waste. Garbage collectors will have two bins for dry and wet waste which will enable segregation of waste at source through door-to-door collection method,” said Manish Gupta, commissioner EDMC. 
Dry waste, including paper and plastic, will be sent to a centralised recycling plant. Wet waste like peels of fruits and vegetables will be dumped in compost pits at the local level, while other organic material will be sent to biogas plants. The remaining waste will then be sent to the landfill. So far corporation claims that households will give a minimum of Rs. 30 a month to the NGO for door-step collection while residents of slums will pay Rs. 10.
Corporation claims that rag pickers trained by the company would be able to sell recyclable waste which will help them earn an extra buck.

“The project is very cost effective and will help us in cutting short expense on transportation of waste to the landfill sites. We will save drastically on fuel and vehicles deployed for collecting and dumping waste. Moreover, it will decongest the road as huge trucks involved in dumping garbage will be off roads,” explained Gupta.

Saturday, 15 November 2014

E-waste dismantlers flout pollution, safety norms

E-waste dismantlers flout pollution, safety norms
New Delhi


Agencies `Clueless' About Units in Seelampur, Other Areas
Tonnes of electronic waste being dismantled in Seelampur on a daily basis not only pollute the environment but also create a serious health risk for workers and other people in the vicinity, say green activists. A visit to the area makes it obvious that the e-waste management rules are far from being implemented here as dismantlers neither use any safety gear nor follow pollution norms. Worse, pollution control agencies have no clue about the goings-on in Seelampur and other areas in the city.“There is no e-waste dismantling or recycling unit in Delhi as per our records,“ said an official of the Delhi Pollution Control Committee (DPCC), which is supposed to monitor such activities in the capital. He said these could be illegal units. “The Central Pollution Control Board (CPCB) may be doing something about them,“ he added.
CPCB officials, on the other hand, put the blame on DPCC. “We are not monitoring them. It's the state pollution agency that's supposed to control them,“ said a CPCB official when asked about e-waste dismantling hubs such as Seelampur, Shashtri Park and Mustafabad.
Truckloads of e-waste --mostly discarded desktop computers and TV sets are brought to Seelampur for dismantling every day where circuit boards are acidwashed or heated on electric stoves or with blowtorches after which recyclable metal components are retrieved. In the process, fumes from heavy metals and acids result in environmental pollution, which also have serious health implications for workers.
Experts say dismantling of e-waste is a thriving market with turnovers in crores.It generates employment for many but the profits go to the middlemen. “From what we understand, most of the money from this business is earned by the middlemen who source the waste from different agencies and sell the recovered valuables. The workers who dismantle the electronic goods are exposed to lead, cadmium, mercury and acid fumes making them vulnerable to severe health impacts. We also suspect that waste from the dismantling process is being thrown into nearby drains, which flow into Yamuna or Hindon,“ said Piyush Mohapatra of Toxics Link, an environmental NGO.
When TOI visited the units near Seelampur's Kanti Nagar, dismantlers were reluctant to share any details about their trade. Some said Seelampur was one of the biggest recycling hubs in the country. “We get waste from Chennai, Mumbai, and Bangalore everyday. We buy each monitor for Rs 800 and then the components are sold at different rates. Not many of us use acid here, they are acid-washed in Mustafabad,“ said a dismantler who had just received a truckload consignment from Bangalore. There were sacks of retrieved copper wires and PVC monitors that were being sold by middlemen who sat with calculators as buyers gathered at each unit to buy discarded compact fluorescent lamps (CFLs), cathode ray tubes (CRT) of TV sets and dismantled circuit boards. The waste from the process is often thrown into a nearby stormwater drain.
Vinod Kumar Sharma of Toxics Link claimed that a large chunk of e-waste had been coming to India from the West. “Usually these imports are listed as donations or items for reuse. But they eventually land up in places such as Seelampur,“ he said.Researchers at Toxics Link attribute this to cheaper recycling options available in India compared to regulated units in those countries. The issue assumes significance as the National Green Tribunal has recently sought response from the Centre on a plea alleging rampant violation of E-waste Management Rules 2011.Toxics Link, in its petition, had alleged that tonnes of second-hand or used goods were being dumped in India leading to pile up of e-wastes.

South Corporation’s ‘zero garbage’ plan starts rolling

South Corporation’s ‘zero garbage’ plan starts rolling

A plan to minimise garbage being sent to the city’s landfill sites has been set in motion by the South Delhi Municipal Corporation (SDMC), which is inviting expressions of interest for its ‘zero garbage’ model this week.
SDMC Commissioner Manish Gupta said on Tuesday that the civic body would be inviting partners to help reduce the amount of waste being added to sanitary landfill sites and maximise the reuse of garbage.
“We are looking for two kinds of partners, one to organise rag-pickers and train them in waste segregation and the other to set up a facility centre for processing,” said Mr. Gupta.
The ‘zero garbage’ model aims to process all waste at the local level, i.e. municipal wards. This will reduce transportation costs and lessen the pressure on the three landfills in Delhi. The plan is to involve households to segregate waste at the source into organic and inorganic.
Dry waste, including paper and plastic, will be sent to a centralised recycling plant. Wet waste, including peels of fruits and vegetables, will be used in compost pits at the local level, while other organic material will be sent to biogas plants. The remaining waste will then be sent to the landfill.
The SDMC’s plan is to preserve the value of waste, as the rag-pickers employed by the NGO will sell the recyclable materials and keep the proceeds. Currently, waste-pickers are forced to climb into garbage dumps or landfills to find valuable metals and plastic. Under the new model, they will get segregated garbage right at the source.
Mr. Gupta said the SDMC will start the project with Dwarka. “We have got 5 acres of land in Dwarka for a facility centre to process the garbage. It will cater to about five wards in the area. We are hoping to have it functional by April 1, 2015,” said the Commissioner.
All generators of waste, households or commercial establishments, will store waste in two separate bins for wet and dry waste. Hazardous waste shall be stored in another container. Households will give a minimum of Rs. 30 a month to the NGO for door-step collection, while residents of slums will pay Rs.10.
Construction and demolition waste, or malba , will not be collected by the NGO. The SDMC will directly collect malba on one day in a week or month.
The Dwarka sub-city currently produces 200-250 metric tonnes of waste everyday that ends up at the Okhla or Bhalswa landfill sites. With the pilot zero garbage project, the SDMC is hoping the waste management system can be replicated across South Delhi.

State releases Rs 10.5 crore for waste mgmt scheme

Chandigarh September 14
The Haryana Government has released a grant amounting to Rs 10.56 crore for development works in Municipal Corporations, Municipal Councils, Municipal Committees and the Haryana Slum Clearance Board under the Urban Solid Waste Management Scheme for 2014-15.
A spokesman of the Urban Local Bodies Department said Rs 32 lakh had been released for the Municipal Corporation, Ambala, and Rs 6.40 lakh for Naraingarh in Ambala district.
A sum of Rs 48 lakh has been released for Bhiwani, Rs 6.40 lakh eachfor Bawani Khera, Charkhi Dadri, Loharu and Siwani in Bhiwani district. A grant of Rs 6.40 lakh each had been released for Bhuna, Fatehabad, Ratia and Tohana in Fatehabad district. A sum of Rs 6.40 lakh each had been released for Farukh Nagar, Haily Mandi, Pataudi and Sohna in Gurgaon district. — TNS

Waste mgmt units for villages

Mandi, September 25
A target has been set to establish solid and water waste management units in all 473 panchayats of the district by 2019, said Rural Development Minister Anil Sharma, while launching the Swachh Panchayat Week and Rashtriya Swachhta Abhiyan under the Nirmal Bharat Abhiyan here today.
He said in the first year, 50 panchayats of the distict would be selected for establishing waste management units. He said under Swachh Panchayat Week, several awareness programmes would be organised and vermin-compost units would be set up in every households for better management of the solid waste.

NGT seeks UP's response on plea to halt construction of plant

The National Green Tribunal today sought response from the UP government on a plea seeking stay on construction of Solid Waste Management Plant (SWMP) in Meerpur Hindu village in Ghaziabad.

A bench headed by NGT chairperson Justice Swantanter Kumar issued notice to UP government, UP Pollution Control Board (UPPCB) and others on a plea filed by residents of 14 villages in Ghaziabad.

"Notice be issued to the respondents by registered post acknowledgement due and Dasti as well. Notice returnable on November 25," the bench said.

The plea, filed through advocate V Madhukar, claims that the construction of the waste management plant will cause groundwater pollution and would wreak havoc on the habitat and ecology in the adjoining areas.

"The primary source of livelihood of the residents of the village is agriculture and any contamination of irrigation water will lead to catastrophic for the health and safety of the residents," the plea said.

It also claimed that the gaseous pollutants such as methane, ammonia and hydrogen sulphide in the air surrounding the waste treatment and disposal facilities will make the living conditions around the plant unbearable and hazardous.

Contending that right to a clean and healthy environment is a fundamental right, the petition submitted that due to the largescale air and water pollution, the local population would be at the risk of developing a large number of diseases.

"Restrain the respondents from establishing the 'Solid Waste Management Plant' over the land of Gram Panchayat Meerpur Hindu, Pargana and Tehsil Loni, district Ghaziabad," the plea said

Civic bodies, DDA to come up with waste processing action plan

Civic bodies, DDA to come up with waste processing action plan


The Capital’s garbage problem has caught the attention of the Centre, which has ordered the municipal corporations and the Delhi Development Authority to set up waste processing units.
According to sources, Lieutenant-Governor Najeeb Jung told Delhi’s municipal commissioners on Monday that Prime Minister Narendra Modi had asked the authorities to focus on waste processing.
Processing and recycling of all kinds of solid waste, including construction debris and green materials, is on the agenda. “We will be meeting with the DDA next week to chart out an action plan. We will be asking for land to set up the processing units,” said South Delhi Municipal Corporation Commissioner Manish Gupta.
He said the civic body would be working out plans for everything from compost pits to C&D waste processing plants, for which the DDA would be asked to provide land.
The North Delhi Municipal Corporation, which already has two processing units at Bhalswa and Narela, will also be asking for further space, said Commissioner Pravin Kumar Gupta.
The country’s first C&D waste processing plant is run by the North Corporation and IL&FS in Burari. The plant is spread over seven acres and processes 2,000 metric tonnes every day, an amount the civic body wants to increase.

प्रधानमंत्री जन धन योजना के बारे में

जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना के बारे में
प्रधानमंत्री जन धन योजना ;पीएमजेडीवाय द्ध राजग सरकार की प्रमुख वित्तीय समावेशन योजना है। पीएमजेडीवाय का उद्देश्य भारत के नागरिकों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक खाते और डेबिट कार्ड मुहैया कराना हंै। वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाने के लिए पीएमजेडीवाय शुरु की गई है। पीएमजेडीवाय आर्थिक निरंतरता बढ़ाने और जनता को वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक जमा खाते, कर्ज और बीमा प्रदान करने के लिए एक साधन के तौर पर बनाई गई है। राजग सरकार ने पीएमजेडीवाय को 'मेरा खाता-मेरा भाग्य विधाता' के आदर्श वाक्य के साथ शुरु किया। इस योजना में भारतीय समाज में गरीब वर्ग के लिए सब्सिडी सुरक्षित करना, ओवरड्राफ्ट सुविधा और पंेशन योजना दीर्घकालिक लक्ष्यों में शामिल है। इसका उद्देश्य सन् 2018 तक 7.5 करोड़ परिवारों को कवर करना है।

क्यों पीएमजेडीवाय राजग सरकार की एक प्रमुख योजना है?
भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में नरेन्द्र मोदी ने आम जनता के लिए वित्तीय समावेशन का वादा किया था। देश की 42 प्रतिशत आबादी के पास बैंकिग प्रणाली तक पहुंच नहीं है। जिसके चलते लोग सूदखोरों, महाजनों या फर्जी जमा योजनाओं के शिकार बनते हैं और अपनी जमापूंजी पर ब्याज के नुकसान के साथ साथ बीमा कवर भी खोते हैं। प्रधानमंत्री के विचार में पीएमजेडीवाय देश भर में वित्तीय सेवाओं के विस्तार के अलावा 'वित्तीय अस्पृश्यता' के युग का अंत है।

पीएमजेडीवाय सरकारी कार्यालयों में किसी भी रुप में मौजूद भ्रष्टाचार से लड़ने के एक हथियार के तौर पर उपयोग के लिए बनी है। भारत की अधिकतर जनता के बैंक खाते होने पर सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जा सकेगी जिससे रिश्वत के मामलों पर काबू पाया जा सकेगा। पीएमजेडीवाय पीएम मोदी के डिजिटल भारत के सपने को भी साकार करने में सहयोगी है। डिजिटल भारत के तहत अर्थव्यवस्था तेजी से कैशलेस हो जाएगी।

पीएमजेडीवाय खाते की सुविधाएं
प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए सभी खाते शून्य-बैलेंस खाते होंगे और रुपे डेबिट कार्ड से लिंक होंगे। खाता खोलने के लिए भावी खाता धारक को 'ग्राहक को जाने' यानि केवाईसी के कठिन अनुपालन की आवश्यकता नहीं है। ग्राहक को सिर्फ एक तस्वीर और एक हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान की आवश्यकता होगी। इस योजना के तहत खोले गए खातों में एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं किया जा सकता है। एक माह में 10,000 रुपये से ज्यादा की कुल निकासी नहीं की जा सकती और खाते का बैलेंस 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं किया जा सकता। यह खाता 12 महीने की अवधि के लिए क्रियाशील होगा। इस अवधि में खाता धारक को वैध पहचान दस्तावेज जैसे आधार कार्ड या पैन कार्ड जमा करने होंगे। ऐसे मामले में खाता एक साल तक सक्रिय रहेगा।

पीएमजेडीवाय खाता धारक को 1 लाख रुपये का मुफ्त दुर्घटना कवर भी प्रदान करती है। 26 जनवरी 2015 के पहले खाता खुलवाने वालों को 30,000 रुपये तक का जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। खाता खोलने के 6 महीने बाद 5,000 रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जाएगी। वित मंत्रालय का मानना है कि रुपे डेबिट कार्ड का प्रावधान बचत को प्रोत्साहन देगा।

शुरुआत और क्रियान्वयन
पीएमजेडीवाय 28 अगस्त 2014 को शुरु की गई। प्रधानमंत्री ने खुद इस योजना को हरी झंडी दिखाई और देश को संबोधित किया। 20 राज्यों के मुख्यमंत्री और कई प्रमुख केंद्रीय मंत्रियों ने इस योजना के उदघाटन अवसर पर शिरकत की। इस योजना का उद्घाटन 76 शहरों में किया गया जिनमें मुंबई, विशाखापत्तनम, पटना, बिलासपुर, गांधीनगर, देहरादून, गुवाहाटी, मुजफ्फरपुर, पंजिम, रायपुर, सूरत और पोर्ट ब्लेयर शामिल हैं।

उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस योजना को सफल बनाने के लिए देश भर के बैंकरों को 7.25 लाख ई-मेल भेजे और योजना के लिए सहयोग मांगा। देश भर में 77,862 से ज्यादा नामांकन शिविर लगाए गए ताकि खाता खुलवाने वालों की तादाद को व्यवस्थित किया जा सके। बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक के निर्देशों के तहत खाता खोलना प्रारंभ कर दिया। शुरुआत के दिन ही प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत रिकाॅर्ड 1.5 करोड़ खाते खोले गए। एक दिन में ऐसा राष्ट्रव्यापी अभियान कभी नहीं हुआ। पहले दस दिन में इस योजना के तहत 3 करोड़ खाते खोले गए। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अगले 20 दिन में 2 करोड़ खाते और खोले गए। बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भारत सरकार से पीएमजेडीवाय की प्रगति की निगरानी में सहायता करने की पेशकश की है।

चिंता और विवाद
प्रधानमंत्री जन धन योजना के बारे में एक चिंता का विषय है कि यह योजना 'ग्राहक को जाने' यानि केवाईसी के मानदंडों को दरकिनार करती है। बैंकों की एक चिंता है कि एक व्यक्ति इस योजना के तहत एक से ज्यादा खाते खुलवा सकता है और एक से अधिक बीमा योजना का लाभ ले सकता है। यदि बीमा राशि आधार कार्ड जैसे दस्तावेज के जरिये ही वितरित की जाएगी तो जिनके पास ये दस्तावेज नहीं है वो लोग इस योजना से लाभ नहीं ले पाएंगे।

इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर एक चिंता यह भी है कि खाताधारकों को इस योजना में ओवरड्राॅफ्ट की सुविधा भी दी जा रही है। इस योजना के तहत ओवरड्राॅफ्ट की सुविधा आधार कार्ड जैसे दस्तावेज वाले खातों पर ही दी जाएगी।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तथ्य

योजना प्रधानमंत्री जन धन योजना
प्रारंभ की तारीख 28 अगस्त 2014
क्रियान्वयन अवधि फेज़ 1- अगस्त 2014 से अगस्त 2015
फेज़ 2- अगस्त 2015 से अगस्त 2018
खातों की संख्या 3 अक्टूबर 2014 तक 5.29 करोड़
कुल जमा 3 अक्टूबर 2014 तक 3.97 करोड़ रुपये

स्वच्छ गंगा परियोजना

स्वच्छ गंगा परियोजना

नमामि गंगे - गंगा को बचाना है
स्वच्छ गंगा परियोजना का आधिकारिक नाम एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन परियोजना या ‘नमामि गंगे’ है। यह मूल रुप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम मिशन है। प्रधानमंत्री बनने से पहले ही मोदी ने गंगा की सफाई को बहुत समर्थन दिया था। उन्होंने वादा किया था कि वह यदि सत्ता में आए तो वो जल्द से जल्द यह परियोजना शुरु करेंगें।

अपने वादे के अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही कुछ महीनों में यह परियोजना शुरु कर दी। इस परियोजना ने उन्हें लाभ भी देना शुरु कर दिया। इसका सबूत उनकी अमेरिका यात्रा में देखने को मिला जहां उन्हें क्लिंटन परिवार ने यह परियोजना शुरु करने पर बधाई दी। यह परियोजना तब खबरों में आई जब आरएसएस ने इसकी निगरानी करने का निर्णय लिया और साथ ही विभिन्न कर लाभ निवेश योजनाओं की घोषणा सरकार ने की।

स्वच्छ गंगा परियोजना क्यों शुरु की गई?
जब केंद्रीय बजट 2014-15 में 2,037 करोड़ रुपयों की आरंभिक राशि के साथ नमामि गंगे नाम की एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन परियोजना शुरु की गई तब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि अब तक इस नदी की सफाई और संरक्षण पर बहुत बड़ी राशि खर्च की गई है लेकिन गंगा नदी की हालत में कोई अंतर नहीं आया। इस परियोजना को शुरु करने का यह आधिकारिक कारण है। इसके अलावा कई सालों से अनुपचारित सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को भारी मात्रा में नदी में छोड़े जाने के कारण नदी की खराब हालत को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता है।

यह परियोजना कब पूरी होगी?
कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से पूछा था कि स्वच्छ गंगा परियोजना कब पूरी होगी? सुप्रीम कोर्ट को जवाब में राष्ट्रीय प्रशासन ने कहा कि इस परियोजना को पूरा होने में 18 सालों का समय लगेगा। इस परियोजना की लंबाई और चैड़ाई को देखते हुए यह कोई असामान्य लक्ष्य नहीं है। यह परियोजना लगभग पूरे देश को कवर करती है क्योंकि यह पूरे उत्तर भारत के साथ उत्तर पश्चिम उत्तराखण्ड और पूर्व में पश्चिम बंगाल तक फैली है।

परियोजना का कवर क्षेत्र
भारत के पांच राज्य उत्तराखण्ड, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार गंगा नदी के पथ में आते हैं। इसके अलावा सहायक नदियों के कारण यह हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और दिल्ली के कुछ हिस्सों को भी छूता है। इसलिए स्वच्छ गंगा परियोजना इन क्षेत्रों को भी अपने अंतर्गत लेती है। कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार से पूछा था कि स्वच्छ गंगा परियोजना कब पूरी होगी? तब कहा गया था कि उन पांच राज्य सरकारों की सहायता भी इस परियोजना को पूरी करने में जरुरी होगी। भारत सरकार ने कहा था कि लोगों में नदी की स्वच्छता को लेकर जागरुकता पैदा करना राज्य सरकारों का काम है।

परियोजना का क्रियान्वयन
नमामि गंगे परियोजना कई चरणों में पूरी होगी। इसकी सटीक जानकारी तो नहीं है पर यह समझा जा सकता है कि सहायक नदियों की सफाई भी इसकी एक प्रमुख गतिविधि होगी। अधिकारियों को उन शहरों का भी प्रबंधन करना होगा जहां से यह नदी गुजरती है और औद्योगिक इकाईयां अपना अपशिष्ट और कचरा इसमें डालती हैं। इस परियोजना का एक प्रमुख भाग पर्यटन का विकास करना है जिससे इस परियोजना हेतु धन जुटाया जा सके। अधिकारियों को इलाहाबाद से पश्चिम बंगाल के हल्दिया तक एक चैनल भी विकसित करना होगा ताकि जल पर्यटन को बढ़ावा मिले।

परियोजना के प्रमुख मुद्दे
नमामि गंगे परियोजना का सबसे बड़ा मुद्दा नदी की लंबाई है। यह 2,500 किमी. की दूरी कवर करने के साथ ही 29 बड़े शहर, 48 कस्बे और 23 छोटे शहर कवर करती है। इससे अलावा नदी का भारी प्रदूषण स्तर और औद्योगिक इकाईयों का अपशिष्ट और कचरा और आम जनता के द्वारा डाला गया कचरा भी एक मुद्दा है।

परियोजना से जुड़े विवाद
स्वच्छ गंगा परियोजना से कई विवाद भी जुड़े हैं, जिसमें से एक इसे चलाने के लिए गठित पैनल के सदस्यों के बीच मतभेद होना है। इस कमेटी का गठन जुलाई 2014 को विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ किया गया था। इस परियोजना का एक प्रमुख मुद्दा इन क्षेत्रों में बढ़ती हुई आबादी से बाढ़ क्षेत्र वापस लेना है। इसके अलावा इनलैंड जलमार्ग के महत्व पर मतभेद भी एक मुद्दा है।

स्वच्छ गंगा परियोजना के तथ्य

परियोजना की लागत 2037 करोड़ रुपये
परियोजना में शामिल मंत्रालय केंद्रीय जलसंसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प
परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी की सफाई
परियोजना प्रारंभ तिथि जुलाई 2014
परियोजना की अवधि 18 साल

स्वच्छ भारत अभियान के बारे में

स्वच्छ भारत अभियान

स्वच्छ भारत अभियान के बारे में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 महात्मा गांधी की जयंती पर अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुआत की। स्वच्छ भारत अभियान या ‘क्लीन इंडिया केंपेन’ देश का सबसे बड़ा स्वच्छता अभियान है। प्रधानमंत्री ने हर भारतीय से इस मिशन में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।

इस अभियान को क्यों शुरु किया गया?
यह कहते हुए बड़ा दुख होता है कि देश में लोगों का खुले में शौच करना एक बड़ी समस्या है। भारत में 72 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण लोग शौच के लिए झाडि़यों के पीछे, खेतों में या सड़क के किनारे जाते हैं। इससे अन्य कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जैसे बच्चों की असमय मौत, संक्रमण और बीमारियों का फैलना और सबसे अहम सुनसान स्थान पर शौच के लिए गई युवतियों का बलात्कार। भारत की आबादी 1.2 बिलियन है और उसमें से करीब 600 मिलियन लोग या 55 प्रतिशत के पास शौचालय नहीं है। उन ग्रामीण इलाकों में जहां शौचालय है वहां भी पानी की उपलब्धता नहीं है। शहरों में झुग्गी में रहने वालों के पास ना तो पानी की आपूर्ति है ना शौचालय की सुविधा।

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी और खुले में शौच की इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखकर यूपीए सरकार ने सन् 1999 में निर्मल भारत अभियान शुरु किया था। इस अभियान में सन् 2012 तक सार्वभौमिक घरेलू स्वच्छता का लक्ष्य स्थापित किया गया। यह सन् 1991 में शुरु किए गए टोटल सेनिटेशन केंपेन का अभिन्न हिस्सा था। हालांकि निर्मल भारत अभियान अपने लक्ष्य को हासिल ना कर सका। निर्मल भारत अभियान को वर्तमान सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान में बदलकर पेश किया है। इसका लक्ष्य भारत में खुले में शौच की समस्या को रोकना, हर घर में शौचालयों का निर्माण करना, पानी की आपूर्ति करना और ठोस और तरल कचरे का उचित तरीके से खात्मा करना है। इस अभियान में सड़कों और फुटपाथों की सफाई, अनाधिकृत क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाना शामिल हैं। इस सबके अलावा इस अभियान में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरुक करना भी शामिल है।

यह कब पूरा होगा?
भारत सरकार ने राजनीतिक दलों, गैर सरकारी संगठनों, निगमों और सक्रिय लोगों की भागीदारी से स्वच्छ भारत अभियान को सन् 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। महात्मा गांधी ने हमेशा स्वच्छता पर बहुत जोर दिया। उनका कहना था कि स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा जरुरी है। वह भारत को स्वच्छ भारत के तौर पर देखना चाहते थे। वह ग्रामीण लोगों की दयनीय हालत से पूरी तरह वाकिफ थे। भारत की आजादी को 67 साल हो गए पर अब भी देश की आधी से ज्यादा आबादी के पास उचित शौचालय नहीं है। इस तथ्य को ध्यान में रखकर भारत सरकार महात्मा गांधी के इस सपने को पूरा करना चाहती है और देश को सन् 2019 तक साफ करना चाहती है। सन् 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है।

सरकार के प्रयास
स्वच्छ भारत अभियान को सही तरीके से लागू करने के लिए 19 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। इस समिति के अध्यक्ष वैज्ञानिक रघुनाथ अनंत माशेलकर हैं। माशेलकर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक हैं। समिति विभिन्न राज्यों में स्वच्छता और पानी की सुविधा देने के सबसे श्रेष्ठ और आधुनिक तरीकों पर सुझाव देगी। यह सुझाव सस्ते, टिकाउ और उपयोगी होंगे। 2 अक्टूबर 2014 को जब पीएम ने यह अभियान शुरु किया तब उनके साथ पार्टी अधिकारी, बाॅलीवुड कलाकार आमिर खान, हजारों सरकारी कर्मचारी, स्कूल और काॅलेज के छात्र थे। प्रधानमंत्री को उनके कैबिनेट मंत्रियों का भी भरपूर सहयोग मिला। इसे जनआंदोलन बनाने के लिए उन्होंने नौ लोगों को सफाई की चुनौती लेने के लिए नामांकित किया, जिनमें प्रियंका चोपड़ा, शशि थरुर, सचिन तेंदुलकर और अनिल अंबानी शामिल हैं। इन नौ लोगों को और नौ लोगों को यह चुनौती देनी होगी। इस प्रकार इससे लोग जुड़ते जाएंगे। इन लोगों ने इस चुनौती को स्वीकार किया है और अन्य लोगों से जुड़ने की अपील की है।

इस मुहिम में कुछ राज्यों ने भी भाग लिया है और कई अन्य कार्यक्रम और योजनाएं इस अभियान को सफल बनाने के लिए तैयार की जा रही हैं।

परियोजना का क्रियान्वयन

स्वच्छ भारत अभियान के दो उप अभियान हैंः
  • स्वच्छ भारत अभियान ग्रामीण
  • स्वच्छ भारत अभियान शहरी

इन दो उप अभियानों के लिए पेयजल और स्वच्छता और ग्रामीण विकास के मंत्रालय ग्रामीण इलाकों में इसकी जिम्मेदारी लेंगे और शहरी विकास मंत्रालय शहरों में इस मिशन की देखभाल करेगा।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण विकास मंत्रालय हर गांव को अगले पांच सालों तक हर साल 20 लाख रुपये देगा। इस अभियान के तहत सरकार ने हर परिवार में व्यक्तिगत शौचालय की लागत 12,000 रुपये तय की है ताकि सफाई, नहाने और कपड़े धोने के लिए पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा सके। अनुमान के मुताबिक पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा इस अभियान पर 1,34,000 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे।

स्वच्छ भारत अभियान के लिए शहरी क्षेत्र में हर घर में शौचालय बनाने, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाने, ठोस कचरे का उचित प्रबंधन करने और 4,041 वैधानिक कस्बों के 1.04 करोड़ घरों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य है। इसमें सार्वजनिक शौचालय की दो लाख से ज्यादा सीट, सामुदायिक शौचालय की दो लाख से ज्यादा सीट मुहैया कराने और हर कस्बे में ठोस कचरे का उचित प्रबंधन करना शामिल है। वह कुछ क्षेत्र जिनमें घरेलू शौचालय बनाने में समस्या है वहां सामुदायिक शौचालय बनाए जाएंगे। आम स्थानों जैसे बाजार, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन के पास, पर्यटक स्थलों पर और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों पर सार्वजनिक शौचालय की सुविधा दी जाएगी।

शहरी विकास मंत्रालय ने इस मिशन के लिए 62,000 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं।

पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 1,96,009 करोड़ रुपये है। इस राशि से देश में 12 करोड़ शौचालय बनाए जाएंगे। ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रालयों ने धार्मिक गुरुओं और समूहों जैसे श्री श्री रविशंकर और गायत्री परिवार से स्वच्छ भारत अभियान में शामिल होने का अनुरोध किया है।

स्वच्छ भारत अभियान के प्रमुख मुद्दे

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शहरी भारत में हर साल 47 मिलियन टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि 75 प्रतिशत से ज्यादा सीवेज का निपटारा नहीं होता है। ठोस कचरे की रिसाइकलिंग भी एक बड़ी समस्या है। भविष्य में बड़ी समस्या से बचने के लिए इन मुद्दों का निपटारा आज किया जाना जरुरी है।
  • ग्रामीण भारत में साफ सफाई की कमी एक बड़ी चुनौती है।
  • एक अन्य बड़ी चुनौती लोगों की सोच बदलना है। हमारे देश के लोग सड़क पर कचरा ना फेंकना कब सीखेंगे? या लोग खुद को और अपने इलाके को साफ रखना कब सीखेंगे?

स्वच्छता की कमी की समस्या इतनी विकराल है कि सन् 2019 तक का प्रधानमंत्री का लक्ष्य पूरा हो पाएगा इसका आश्चर्य होता है ?

विवाद
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को देश और विदेशों में सराहा गया है पर इससे कुछ विवाद भी जुड़े हैं। इससे मिलते जुलते अभियान पहले भी शुरु किए गए पर वह सफल नहीं हुए, जैसे उदाहरण के तौर पर निर्मल भारत अभियान। विवाद इसलिए भी उठा क्योंकि स्वच्छ भारत अभियान यूपीए के निर्मल भारत अभियान जैसा ही है। उस समय भी बहुत धन उसमें लगाया गया था। उससे क्या हासिल हुआ? वह सारा पैसा कहां गया?

सच तो यह है कि ऐसे अभियान पर विवाद पैदा नहीं होने चाहिये। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान को राजनीति से परे और देशभक्ति से प्रेरित बताया था।

निष्कर्ष
सिर्फ अभियान शुरु करना ही काफी नहीं है, परिणाम मायने रखता है। सिर्फ सरकार इसे सफल नहीं बना सकती, लोगों की भागीदारी सबसे जरुरी है। इस कार्यक्रम के लिए विस्तृत ब्लू प्रिंट बनाना जरुरी है। समग्र तरीके से स्वच्छ भारत अभियान को लागू करने, सरकार और लोगों के प्रयासों से आने वाले सालों में भारत अवश्य एक स्वच्छ देश बन सकता है।

स्वच्छ भारत अभियान: तथ्य और आंकड़े

  • परियोजना की लागत: 1,96,009 करोड़ रुपये
  • परियोजना शुरु होने की तारीख: 2 अक्टूबर 2014
  • परियोजना खत्म होने की तारीख: 2 अक्टूबर 2019
  • परियोजना में शामिल मंत्रालय: शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, राज्य सरकार, गैर सरकारी संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निगम आदि।
  • परियोजना का लक्ष्य: भारत को पांच सालों में गंदगी से मुक्त देश बनाना। ग्रामीण और शहरी इलाकों में सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाना और पानी की आपूर्ति करना। सड़कें, फुटपाथ और बस्तियां साफ रखना और अपशिष्ट जल को स्वच्छ करना।

Friday, 14 November 2014

स्वच्छ भारत अभियान ‘Swacch Bharat Abhiyan

स्वच्छ भारत अभियान ‘Swacch Bharat Abhiyan
‘ स्वच्छ सारे तन,
( Swachh saare tan, )
स्वच्छ सारा पानी और अन्न,
(Swachh saara pani aur ann,)
स्वच्छ सारे मकान,
(Swacch saare makan,)
स्वच्छ सारे अंगन,
( Swacch saare aangan; )
स्वच्छ सारा पर्यावरण,
;Swacch saara paryavaran ;)
यही हैं प्रधानमंत्री मोदीजीका ,
( Yehi hein prandhan mantri Modiji ka )
स्वच्छ भारत अभियान !
( ‘Swacch Bharat Abhiyan’)
और हम सभी सवा-सौ करोड़
( Aur hum sabhi sava -sau karod )
भारतीयोंका ‘मिशन’ ! (Bharatiyonka mission !)
+ +
( यदि जुड़ जाये इसमें; )
( yadi jud jay ismein ; )
स्वच्छ अंतहकरन और मन,
( Swacch antahkaran aur man ,)
स्वच्छ विचार और ज़ुबान,
( Swacch vichar aur juban)
स्वच्छ आचार और ईमान,
(Swacch aachar aur iman, )
स्वच्छ उध्म् और धन,
(Swachh uddhyam aur dhan; ) स्वच्छ ग्यान और विग्यान,
(Swatch gnan aur vignan , )
स्वच्छ राजनीतीऔर राजकारण,
(Swacch rajneeti aue rajkaran)
और बढ़ाये दुनियाँमें अपनी महान
(Aur badhaye duniyan me apani mahan )
भारत माँकी आन ,बाण और शान ,
(Bharat maan ki aan,baan aur shaan !)
तभी तो गर्वसे कह पायें सारे जन
(Tabhi to garvse kah paye sare jan,)
मेरा भारत महान !
(Mera Bharat Mahan !)
मेरा भारत महान !! Mera Bharat Mahan !!
मेरा भारत महान !!! Mera Bharat Mahan !!!)

Tuesday, 28 October 2014

Waste Segregation



Waste Segregation
Segregation as per Solid Waste (Management and Handling) Rules 2000
is now compulsory. Segregation in simple language means separation of
waste into DRY AND WET, so that it is easier to handle it later

Bio-Degradable Waste
(Organic Waste or Kitchen Waste)
• Vegetable
• Fruits
• Flowers
• Leaves from garden
• Wood shavings, pencil shavings

To know if a waste is bio-degradable or not, ask yourself
this question: if it is put into a pit and covered, will it
become mud or compost?
Why is Segregation important?
Segregation is important because :
• If the waste is not separated properly, it all gets mixed
up in landfills. The dangers of this is that they all leak
after a period of time, resulting in leachate or toxic
soup at the bottom, which can contaminate ground
water and release explosive methane gas.
• Methane is a green house gas, which ultimately leads
to climate change, extreme climates and droughts. We
can see the impact already in the world.
• Segregation protects health. When ragpickers put
their hands into the waste to clean it up, it results in
cuts that further leads to infections, resulting in






Non-Bio Degradable Waste
• Plastics
• Paper
• Glass
• Metal
• Frooti , and other tetrapacks
• Ponche ka purana kapra
• Aluminium foil
deterioration of a ragpicker’s health. Hence, it becomes
our responsibility to help these ragpickers by carefully
segregating the waste that is generated at our homes.
• When the waste is not separated properly it leads to
less recycling because it is not easy to remove materials
for recycling. This means many resources are wasted.
How can you segregate?
• Start segregating the waste in your own house now.
• Segregation is one of the easiest practice to follow,
it starts in your own kitchen. The waste can be
categorized as wet and dry waste.
• Take two separate bins. One, which will have all the
wet waste, and the other will have all the dry 

Global S.S.Company 

Achyut Pathak

Wednesday, 8 October 2014

स्वच्छ भारत मिशन

स्वच्छ भारत मिशन

  • महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश की कल्पना भी थी।
  • महात्मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर माँ भारती को आज़ाद कराया।
  • अब हमारा कर्तव्य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें।
  • मैं शपथ लेता हूं कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूंगा और उसके लिए समय दूंगा।
  • हर वर्ष 100 घंटे यानी हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा।
  • मैं न गंदगी करूंगा न किसी और को करने दूंगा।
  • सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूंगा।
  • मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं।
  • इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा।
  • मैं आज जो शपथ ले रहा हूं, वह अन्य 100 व्यक्तियों से भी करवाऊंगा।
  • वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा।
  • मुझे मालूम है कि स्वच्छता की तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश को स्वच्छ बनाने में मदद करेगा।

स्वच्छ भारत मिशन

स्वच्छ भारत मिशन

  • महात्मा गांधी ने जिस भारत का सपना देखा था उसमें सिर्फ राजनैतिक आजादी ही नहीं थी, बल्कि एक स्वच्छ एवं विकसित देश की कल्पना भी थी।
  • महात्मा गांधी ने गुलामी की जंजीरों को तोड़कर माँ भारती को आज़ाद कराया।
  • अब हमारा कर्तव्य है कि गंदगी को दूर करके भारत माता की सेवा करें।
  • मैं शपथ लेता हूं कि मैं स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहूंगा और उसके लिए समय दूंगा।
  • हर वर्ष 100 घंटे यानी हर सप्ताह 2 घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के इस संकल्प को चरितार्थ करूंगा।
  • मैं न गंदगी करूंगा न किसी और को करने दूंगा।
  • सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से एवं मेरे कार्यस्थल से शुरुआत करूंगा।
  • मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं उसका कारण यह है कि वहां के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं।
  • इस विचार के साथ मैं गांव-गांव और गली-गली स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा।
  • मैं आज जो शपथ ले रहा हूं, वह अन्य 100 व्यक्तियों से भी करवाऊंगा।
  • वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा।
  • मुझे मालूम है कि स्वच्छता की तरफ बढ़ाया गया मेरा एक कदम पूरे भारत देश को स्वच्छ बनाने में मदद करेगा।

Thursday, 2 October 2014

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के शुभारंभ की तैयारियों की समीक्षा की

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के शुभारंभ की तैयारियों की समीक्षा की

September 19, 2014 Author: admin
प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी आज कहा कि मिशन स्वच्छ भारत पूरे देश का एजेंडा बन ना चाहिए। 2 अक्टूबर को शुरू होने वाले इस महा अभियान का लक्ष्य 2019 तक स्वच्छ भारत बनाना है।
684Reviews Mission Swachh Bharat
रधानमंत्री, मिशन स्वच्छ भारत के शुभारंभ की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
श्री मोदी ने कहा कि 2 अक्टूबर को होने वाली गतिविधियां राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केवल प्रधानमंत्री के आयोजन तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि सफाई से संबधित गतिविधियां देश भर में प्रत्येक गांव में की जानी चाहिए, उन्होंने इस मिशन को सफल बनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने के लिए आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत के लिए गांधीजी हमारे प्रेरणा होने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने ग्राम स्तर से लेकर सभी स्तरों पर मिशन स्वच्छ भारत को कानूनी तौर पर स्थापित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय से सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले गांवों की संभावनाओं का पता लगाने को कहा। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में भी सफाई के मानक स्थापित करने को कहा।
प्रधानमंत्री ने सरपंचों, सांसदों, विधायकों आदि सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों के लिए विशिष्ट भूमिकाएं बनाने के महत्व को रेखांकित किया।
इस अवसर पर शहरी विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास, मानव संसाधन विकास और सूचना एवं प्रसारण सहित विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों ने मिशन पर अपने विचारों को प्रस्तुत किया। गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे सटे कस्बों को स्वच्छ भारत अभियान में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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